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mahabharat 9.52.3-4h: वैशम्पायनजी बोले - राजन! प्राचीन काल में कुणिर्ग नामक एक अत्यन्त पराक्रमी एवं यशस्वी ऋषि रहते थे। तपस्वियों में श्रेष्ठ उन महर्षि ने घोर तप करके अपने मन से एक सुन्दर कन्या को जन्म दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  9.52.3-4h 
वैशम्पायन उवाच
ऋषिरासीन्महावीर्य: कुणिर्गर्गो महायशा:।
स तप्त्वा विपुलं राजंस्तपो वै तपतां वर:॥ ३॥
मनसाथ सुतां सुभ्रूं समुत्पादितवान् विभु:।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन! प्राचीन काल में कुणिर्ग नामक एक अत्यन्त पराक्रमी एवं यशस्वी ऋषि रहते थे। तपस्वियों में श्रेष्ठ उन महर्षि ने घोर तप करके अपने मन से एक सुन्दर कन्या को जन्म दिया।
 
Vaishampayanji said – King! In ancient times, there lived a very powerful and famous sage named Kunirgarga. That Maharishi, the best among those who do penance, performed great penance and gave birth to a beautiful daughter from his mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)