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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 26-28
 
 
श्लोक  9.52.26-28 
तत्रस्थश्चापि शुश्राव हतं शल्यं हलायुध:॥ २६॥
तत्रापि दत्त्वा दानानि द्विजातिभ्य: परंतप:।
शुश्राव शल्यं संग्रामे निहतं पाण्डवैस्तदा॥ २७॥
समन्तपञ्चकद्वारात् ततो निष्क्रम्य माधव:।
पप्रच्छर्षिगणान् राम: कुरुक्षेत्रस्य यत् फलम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहते हुए शत्रुओं को संताप देने वाले बलरामजी ने शल्य की मृत्यु का समाचार सुना था। वहाँ भी मधुवंशी बलरामजी ने ब्राह्मणों को नाना प्रकार के दान दिए और समन्तपंचक द्वार से बाहर आकर ऋषियों से कुरुक्षेत्र में आने का फल पूछा ॥26-28॥
 
While staying there, Balramji, who tormented the enemies, had heard the news of Shalya's death. There also Madhuvanshi Balram gave various donations to the Brahmins and after coming out of the Samantapanchak gate, he asked the sages about the result of visiting Kurukshetra. 26-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)