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mahabharat 9.52.25-26h: इस प्रकार मैंने तुमसे उस वृद्धा कन्या के महान चरित्र, उसके ब्रह्मचर्य पालन तथा स्वर्ग प्राप्ति के मोक्ष का वर्णन किया।   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  9.52.25-26h 
एतत्ते वृद्धकन्याया व्याख्यातं चरितं महत्॥ २५॥
तथैव ब्रह्मचर्यं च स्वर्गस्य च गति: शुभा।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने तुमसे उस वृद्धा कन्या के महान चरित्र, उसके ब्रह्मचर्य पालन तथा स्वर्ग प्राप्ति के मोक्ष का वर्णन किया।
 
This is how I described to you the great character of the old girl, her observance of celibacy and the salvation of attaining heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)