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mahabharat 9.52.23: ऐसा कहकर वह पुण्यात्मा तपस्विनी शरीर त्यागकर स्वर्ग को चली गई, जबकि मुनि उसके दिव्य रूप का चिंतन करते हुए अत्यंत दुःखी हो रहे थे॥23॥   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.52.23 
एवमुक्त्वा तत: साध्वी देहं त्यक्त्वा दिवं गता।
ऋषिरप्यभवद् दीनस्तस्या रूपं विचिन्तयन्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वह पुण्यात्मा तपस्विनी शरीर त्यागकर स्वर्ग को चली गई, जबकि मुनि उसके दिव्य रूप का चिंतन करते हुए अत्यंत दुःखी हो रहे थे॥23॥
 
Saying this the pious ascetic left her body and went to heaven. While the sage was very sad contemplating her divine form.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)