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mahabharat 9.52.21-22: ऐसा कहकर वह वहाँ से चली गई। जाते समय उसने फिर कहा - 'जो कोई मन को एकाग्र करके इस पवित्र स्थान में स्नान करके देवताओं को तर्पण करेगा और वहाँ एक रात ठहरेगा, उसे विधिपूर्वक अट्ठावन वर्षों तक ब्रह्मचर्य पालन करने का फल मिलेगा।'॥21-22॥   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  9.52.21-22 
सा निर्गताब्रवीद् भूयो योऽस्मिंस्तीर्थे समाहित:।
वसते रजनीमेकां तर्पयित्वा दिवौकस:॥ २१॥
चत्वारिंशतमष्टौ च द्वौ चाष्टौ सम्यगाचरेत्।
यो ब्रह्मचर्यं वर्षाणि फलं तस्य लभेत स:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वह वहाँ से चली गई। जाते समय उसने फिर कहा - 'जो कोई मन को एकाग्र करके इस पवित्र स्थान में स्नान करके देवताओं को तर्पण करेगा और वहाँ एक रात ठहरेगा, उसे विधिपूर्वक अट्ठावन वर्षों तक ब्रह्मचर्य पालन करने का फल मिलेगा।'॥21-22॥
 
Saying this she left from there. While going she again said - 'Whoever concentrates his mind and takes bath in this holy place and offers oblations to the gods and stays there for one night, he will get the reward of observing celibacy for fifty-eight years according to the prescribed rules.'॥ 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)