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mahabharat 9.52.20: हे तपस्वी मुनियों में श्रेष्ठ ब्रह्मर्षि! आपकी बताई हुई शर्तों के अनुसार मैं आपके पास रह चुका हूँ। आपका कल्याण हो, आपकी कृपा हो। अब मुझे आज्ञा दीजिए, मैं जा रहा हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.52.20 
यस्त्वया समयो विप्र कृतो मे तपतां वर।
तेनोषितास्मि भद्रं ते स्वस्ति तेऽस्तु व्रजाम्यहम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे तपस्वी मुनियों में श्रेष्ठ ब्रह्मर्षि! आपकी बताई हुई शर्तों के अनुसार मैं आपके पास रह चुका हूँ। आपका कल्याण हो, आपकी कृपा हो। अब मुझे आज्ञा दीजिए, मैं जा रहा हूँ।'
 
Brahmarshi, the best among ascetic sages! I have stayed with you as per the conditions you had laid down. May you be blessed and blessed. Now give me your permission, I am leaving.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)