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mahabharat 9.52.19: उसे अपने तेज से चारों ओर प्रकाश फैलाते देखकर गालवकुमार बहुत प्रसन्न हुए और एक रात उसके पास रहे। प्रातः होते ही उसने ॥19॥ मुनि से कहा -॥   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.52.19 
तां दृष्ट्वा गालवि: प्रीतो दीपयन्तीमिव श्रिया।
उवास च क्षपामेकां प्रभाते साब्रवीच्च तम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उसे अपने तेज से चारों ओर प्रकाश फैलाते देखकर गालवकुमार बहुत प्रसन्न हुए और एक रात उसके पास रहे। प्रातः होते ही उसने ॥19॥ मुनि से कहा -॥
 
Seeing her spreading light all around with her radiance, Galavakumar was very pleased and stayed with her for one night. As soon as the morning came she said to the sage -॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)