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mahabharat 9.52.16-17: फिर 'बहुत अच्छा' कहकर उसने अपना हाथ ऋषि के हाथ में रख दिया। तब गालव के पुत्र ने विवाह की रस्म पूरी की और शास्त्रविधि के अनुसार अग्नि में हवन करके उसे अपने हाथ में ले लिया।   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.52.16-17 
तथेति सा प्रतिश्रुत्य तस्मै पाणिं ददौ तदा॥ १६॥
यथादृष्टेन विधिना हुत्वा चाग्निं विधानत:।
चक्रे च पाणिग्रहणं तस्योद्वाहं च गालवि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
फिर 'बहुत अच्छा' कहकर उसने अपना हाथ ऋषि के हाथ में रख दिया। तब गालव के पुत्र ने विवाह की रस्म पूरी की और शास्त्रविधि के अनुसार अग्नि में हवन करके उसे अपने हाथ में ले लिया।
 
Then saying 'very good' she placed her hand in the sage's hand. Then Galava's son performed the ritual of marriage and took her in his hand after performing the havan in fire as prescribed in the scriptures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)