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mahabharat 9.52.1: जनमेजय ने पूछा, "हे प्रभु! वह कन्या पूर्वकाल में क्यों तपस्या में प्रवृत्त हुई थी? उसने क्यों तपस्या की थी और उसके क्या नियम थे?"॥1॥   |   mahabharat अध्याय 9.52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 52: वृद्ध कन्याका चरित्र, शृंगवान‍्के साथ उसका विवाह और स्वर्गगमन तथा उस तीर्थका माहात्म्य  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.52.1 
जनमेजय उवाच
कथं कुमारी भगवंस्तपोयुक्ता ह्यभूत् पुरा।
किमर्थं च तपस्तेपे को वास्या नियमोऽभवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा, "हे प्रभु! वह कन्या पूर्वकाल में क्यों तपस्या में प्रवृत्त हुई थी? उसने क्यों तपस्या की थी और उसके क्या नियम थे?"॥1॥
 
Janamejaya asked, "O Lord! Why did that virgin engage in tapasya in the past? Why did she do tapasya and what were her rules?"॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)