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mahabharat 9.51.51-52h: साठ हजार ऋषिगण स्वाध्याय के उद्देश्य से ब्रह्मर्षि सारस्वत के शिष्य बन गये थे।   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.51.51-52h 
षष्टिर्मुनिसहस्राणि शिष्यत्वं प्रतिपेदिरे॥ ५१॥
सारस्वतस्य विप्रर्षेर्वेदस्वाध्यायकारणात्।
 
 
अनुवाद
साठ हजार ऋषिगण स्वाध्याय के उद्देश्य से ब्रह्मर्षि सारस्वत के शिष्य बन गये थे।
 
Sixty thousand sages had become the disciples of Brahmarishi Saraswat for the purpose of self-study. 51 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)