Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.51.47-49h: तब उन ऋषियों ने कहा, ‘बेटा, तुम अभी बालक हो।’ (हम तुम्हारे शिष्य कैसे हो सकते हैं?) तब सारस्वत ने पुनः उन ऋषियों से कहा, ‘मैं तुम्हें अपना शिष्य बनाना चाहता हूँ, ताकि मेरा धर्म नष्ट न हो, क्योंकि जो अधर्मपूर्वक वेदों का प्रचार करता है और जो अधर्मपूर्वक उन वेद मन्त्रों को ग्रहण करता है, वे दोनों शीघ्र ही नीच गति को प्राप्त हो जाते हैं अथवा दोनों एक-दूसरे के शत्रु हो जाते हैं।’ 47-48 1/2। | mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्राब्रुवन् मुनिगणा बालस्त्वमसि पुत्रक॥ ४७॥
स तानाह न मे धर्मो नश्येदिति पुनर्मुनीन्।
यो ह्यधर्मेण वै ब्रूयाद् गृह्णीयाद् योऽप्यधर्मत:॥ ४८॥
हीयेतां तावुभौ क्षिप्रं स्यातां वा वैरिणावुभौ।
अनुवाद
तब उन ऋषियों ने कहा, ‘बेटा, तुम अभी बालक हो।’ (हम तुम्हारे शिष्य कैसे हो सकते हैं?) तब सारस्वत ने पुनः उन ऋषियों से कहा, ‘मैं तुम्हें अपना शिष्य बनाना चाहता हूँ, ताकि मेरा धर्म नष्ट न हो, क्योंकि जो अधर्मपूर्वक वेदों का प्रचार करता है और जो अधर्मपूर्वक उन वेद मन्त्रों को ग्रहण करता है, वे दोनों शीघ्र ही नीच गति को प्राप्त हो जाते हैं अथवा दोनों एक-दूसरे के शत्रु हो जाते हैं।’ 47-48 1/2।
Then those sages said, 'Son, you are still a child.' (How can we be your disciples?) Then Saraswat again said to those sages, 'I want to make you my disciples so that my religion does not get destroyed, because one who preaches the Vedas in an unrighteous manner and one who accepts those Vedic mantras in an unrighteous manner, both soon reach a low state or both become enemies of each other. 47-48 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥