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mahabharat 9.51.45-47h: राजन! यह सुनकर वे सभी महर्षि वहाँ आये और महर्षि सारस्वत से इस प्रकार बोले - ‘मुनि! आप हमें वेदों का उपदेश दीजिये।’ तब सारस्वत ने उनसे कहा - ‘आप सब लोग विधिपूर्वक मेरा शिष्यत्व ग्रहण करें।’   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 45-47h
 
 
श्लोक  9.51.45-47h 
तत: सर्वे समाजग्मुस्तत्र राजन् महर्षय:॥ ४५॥
सारस्वतं मुनिश्रेष्ठमिदमूचु: समागता:।
अस्मानध्यापयस्वेति तानुवाच ततो मुनि:॥ ४६॥
शिष्यत्वमुपगच्छध्वं विधिवद्धि ममेत्युत।
 
 
अनुवाद
राजन! यह सुनकर वे सभी महर्षि वहाँ आये और महर्षि सारस्वत से इस प्रकार बोले - ‘मुनि! आप हमें वेदों का उपदेश दीजिये।’ तब सारस्वत ने उनसे कहा - ‘आप सब लोग विधिपूर्वक मेरा शिष्यत्व ग्रहण करें।’
 
King! On hearing this, all those great sages came there and spoke to the great sage Saraswat in this manner - 'Muni! Please teach us the Vedas.' Then Saraswat said to them - 'You all should accept my discipleship in a proper manner.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)