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श्लोक  9.51.34 
जज्ञे शैलगुरु: प्रांशुर्महिम्ना प्रथित: प्रभु:।
नित्यमुद्विजते चास्य तेजस: पाकशासन:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह पर्वत के समान भारी और ऊँचे थे। यह शक्तिशाली ऋषि अपनी महानता के लिए सर्वत्र विख्यात था। पक्षशासन इंद्र उनके तेज से सदैव व्याकुल रहते थे।
 
He was as heavy and tall as a mountain. This powerful sage was renowned everywhere for his greatness. Pakshasaasan Indra was always perturbed by his brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)