Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.51.31-32h: तब इन्द्र ने प्रसन्न होकर दधीचि की हड्डियों से गदा, वज्र, चक्र तथा अनेक भारी दण्ड जैसे अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र बनाए।   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  9.51.31-32h 
तस्यास्थिभिरथो शक्र: सम्प्रहृष्टमनास्तदा।
कारयामास दिव्यानि नानाप्रहरणानि च॥ ३१॥
गदावज्राणि चक्राणि गुरून् दण्डांश्च पुष्कलान्।
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र ने प्रसन्न होकर दधीचि की हड्डियों से गदा, वज्र, चक्र तथा अनेक भारी दण्ड जैसे अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र बनाए।
 
Then Indra, being pleased, made various divine weapons from the bones of Dadhicha, such as mace, thunderbolt, discus and numerous heavy staffs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)