Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.51.29-30: कुरुश्रेष्ठ! जब देवताओं ने उनसे भस्म के लिए विनती की, तब ऋषि दधीच ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने प्राण त्याग दिए। उस समय देवताओं के प्रेम के कारण वे अक्षय लोक में चले गए। 29-30॥ | mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स च तैर्याचितोऽस्थीनि यत्नादृषिवरस्तदा॥ २९॥
प्राणत्यागं कुरुश्रेष्ठ चकारैवाविचारयन्।
स लोकानक्षयान् प्राप्तो देवप्रियकरस्तदा॥ ३०॥
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! जब देवताओं ने उनसे भस्म के लिए विनती की, तब ऋषि दधीच ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने प्राण त्याग दिए। उस समय देवताओं के प्रेम के कारण वे अक्षय लोक में चले गए। 29-30॥
Kurushrestha! Sage Dadhich gave up his life without any hesitation when the gods earnestly requested him for the ashes. At that time, due to the love of the gods, he went to Akshaya Lokas. 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥