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mahabharat 9.51.24-25h: हे भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार उनसे स्तुति पाकर और वर पाकर महानदी अपने पुत्र के साथ प्रसन्नतापूर्वक चली गईं॥24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  9.51.24-25h 
एवं सा संस्तुतानेन वरं लब्ध्वा महानदी॥ २४॥
पुत्रमादाय मुदिता जगाम भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार उनसे स्तुति पाकर और वर पाकर महानदी अपने पुत्र के साथ प्रसन्नतापूर्वक चली गईं॥24 1/2॥
 
Bharatshrestha! Thus, being praised by them and getting the groom, Mahanadi went away happily with her son. 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)