श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.51.2 
तत्राप्युपस्पृश्य बले दत्त्वा दानानि चात्मवान्।
सारस्वतस्य धर्मात्मा मुनेस्तीर्थं जगाम ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा और मनस्वी बलरामजी भी उस तीर्थ में स्नान और दान करके सारस्वत मुनि के तीर्थ में गए॥2॥
 
The religious and mindful Balramji also went to the pilgrimage of Saraswat Muni after taking bath and donating in that pilgrimage. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)