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mahabharat 9.51.19-21: महाभागे! आप प्राचीन काल में ब्रह्माजी के सरोवर से प्रकट हुई हैं। नदियों में सरस्वती श्रेष्ठ हैं! कठोर व्रत का पालन करने वाले मुनिगण आपकी महिमा जानते हैं। प्रियदर्शन! आपने मुझ पर भी सदैव प्रेम किया है; अतः वरवर्णिनी! आपका यह महान लोक-प्रिय पुत्र आपके नाम पर 'सारस्वत' कहलाएगा। 19-21॥   |   mahabharat अध्याय 9.51: सारस्वततीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दधीच ऋषि और सारस्वत मुनिके चरित्रका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.51.19-21 
प्रस्रुतासि महाभागे सरसो ब्रह्मण: पुरा॥ १९॥
जानन्ति त्वां सरिच्छ्रेष्ठे मुनय: संशितव्रता:।
मम प्रियकरी चापि सततं प्रियदर्शने॥ २०॥
तस्मात् सारस्वत: पुत्रो महांस्ते वरवर्णिनि।
तवैव नाम्ना प्रथित: पुत्रस्ते लोकभावन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाभागे! आप प्राचीन काल में ब्रह्माजी के सरोवर से प्रकट हुई हैं। नदियों में सरस्वती श्रेष्ठ हैं! कठोर व्रत का पालन करने वाले मुनिगण आपकी महिमा जानते हैं। प्रियदर्शन! आपने मुझ पर भी सदैव प्रेम किया है; अतः वरवर्णिनी! आपका यह महान लोक-प्रिय पुत्र आपके नाम पर 'सारस्वत' कहलाएगा। 19-21॥
 
Maha Bhaage! You have appeared from Brahmaji's lake in ancient times. Saraswati is the best among rivers! The sages who follow strict fasts know your glory. Priyadarshan! You have always loved me too; Hence Varavarnini! This great public-spirited son of yours will be called 'Saraswat' after your name. 19-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)