Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.9-10h: जनमेजय! उसके बाद कुछ समय तक ऐसा हुआ कि देवल को जैगीषव्य ऋषि के दर्शन सर्वदा नहीं होते थे। धर्म में पारंगत ज्ञानी तपस्वी जैगीषव्य केवल भोजन करते समय या भिक्षा लेते समय ही देवल के पास आते थे॥9 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैगीषव्यं मुनिवरं न ददर्शाथ देवल:।
आहारकाले मतिमान् परिव्राड् जनमेजय॥ ९॥
उपातिष्ठत धर्मज्ञो भैक्षकाले स देवलम्।
अनुवाद
जनमेजय! उसके बाद कुछ समय तक ऐसा हुआ कि देवल को जैगीषव्य ऋषि के दर्शन सर्वदा नहीं होते थे। धर्म में पारंगत ज्ञानी तपस्वी जैगीषव्य केवल भोजन करते समय या भिक्षा लेते समय ही देवल के पास आते थे॥9 1/2॥
Janamejaya! After that, for some time, it so happened that Deval could not see sage Jaigishavya all the time. The wise ascetic Jaigishavya, who was well versed in religion, would come to Deval only when he had food or when he was taking alms.॥9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥