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mahabharat 9.50.7-8: यद्यपि महामुनि जैगीषव्य उस आश्रम में रहते थे, तथापि देवल मुनि ने उनके समक्ष धर्मानुसार योगाभ्यास नहीं किया। इस प्रकार उन दोनों ने वहाँ रहते हुए बहुत समय व्यतीत किया ॥7-8॥   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  9.50.7-8 
तं तत्र वसमानं तु जैगीषव्यं महामुनिम्॥ ७॥
देवलो दर्शयन्नेव नैवायुञ्जत धर्मत:।
एवं तयोर्महाराज दीर्घकालो व्यतिक्रमत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि महामुनि जैगीषव्य उस आश्रम में रहते थे, तथापि देवल मुनि ने उनके समक्ष धर्मानुसार योगाभ्यास नहीं किया। इस प्रकार उन दोनों ने वहाँ रहते हुए बहुत समय व्यतीत किया ॥7-8॥
 
Although Mahamuni Jaigishavya lived in that ashram, yet Deval Muni did not practice yoga in front of him as per the religion. In this way, both of them spent a lot of time living there. ॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)