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तत्राप्युपस्पृश्य ततो महात्मा
दत्त्वा च वित्तं हलभृद् द्विजेभ्य:।
अवाप्य धर्मं परमार्थकर्मा
जगाम सोमस्य महत् सुतीर्थम्॥ ६९॥
अनुवाद
परोपकारी कर्म करने वाले महात्मा हलधर वहाँ स्नान करके, ब्राह्मणों को दान देकर तथा अपने धर्म का फल प्राप्त करके महान एवं उत्तम तीर्थ सोम को चले गए। 69।
The great soul Haldhar, who performed philanthropic deeds, after bathing there and giving charity to the Brahmins and getting the fruits of his religion, went to the great and best pilgrimage place of Som. 69.
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें
सारस्वतोपाख्यानविषयक पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥