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mahabharat 9.50.65-66h: तत्पश्चात् महर्षि नारद ने देवताओं से कहा, 'जैगीषव्य तपस्या नहीं कर रहे हैं, क्योंकि असित अपनी शक्ति दिखाकर ऋषियों को आश्चर्यचकित कर रहे हैं।'   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  9.50.65-66h 
अथाब्रवीदृषिवरो देवान् वै नारदस्तथा॥ ६५॥
जैगीषव्ये तपो नास्ति विस्मापयति योऽसितम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महर्षि नारद ने देवताओं से कहा, 'जैगीषव्य तपस्या नहीं कर रहे हैं, क्योंकि असित अपनी शक्ति दिखाकर ऋषियों को आश्चर्यचकित कर रहे हैं।'
 
Thereafter the great sage Narada told the gods, 'Jaigishavya is not performing penance because Asit is surprising the sages by showing his power.' 65 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)