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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  9.50.63-64h 
एवमादीनि संचिन्त्य देवलो निश्चयात् तत:॥ ६३॥
प्राप्तवान् परमां सिद्धिं परं योगं च भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! इन सब बातों पर विचार करके देवल ने संन्यास लेने का निश्चय किया। ऐसा करके उसे परम सिद्धि और उत्तम योग की प्राप्ति हुई।
 
Bharat! After thinking over all these matters, Deval decided to take up Sanyas (renunciation of worldly possessions). By doing this, he attained the highest perfection and the best yoga. 63 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)