Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.50.62-63h: हे राजन! इस बात को मन में विचारकर देवल ने गृहस्थ धर्म त्यागकर मोक्ष धर्म को अपना लिया।   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  9.50.62-63h 
इति निश्चित्य मनसा देवलो राजसत्तम॥ ६२॥
त्यक्त्वा गार्हस्थ्यधर्मं स मोक्षधर्ममरोचयत्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस बात को मन में विचारकर देवल ने गृहस्थ धर्म त्यागकर मोक्ष धर्म को अपना लिया।
 
O best king! Having thought over this matter in his mind, Deval gave up the duty of being a householder and chose the duty of salvation for himself. 62 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)