Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.59-61h: भरत! यह देखकर हजारों फल, मूल, पवित्र घास, फूल और औषधियाँ बार-बार रोने लगीं और कहने लगीं कि 'यह दुष्ट बुद्धिवाला क्षुद्र देवल अवश्य ही पुनः हमारा विनाश करेगा। इसीलिए समस्त प्राणियों को अभयदान देकर भी अब इसे अपनी प्रतिज्ञा याद नहीं रहती।'॥59-60 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! यह देखकर हजारों फल, मूल, पवित्र घास, फूल और औषधियाँ बार-बार रोने लगीं और कहने लगीं कि 'यह दुष्ट बुद्धिवाला क्षुद्र देवल अवश्य ही पुनः हमारा विनाश करेगा। इसीलिए समस्त प्राणियों को अभयदान देकर भी अब इसे अपनी प्रतिज्ञा याद नहीं रहती।'॥59-60 1/2॥
Bharata! Seeing this, thousands of fruits, roots, sacred grass, flowers and medicinal herbs started crying repeatedly saying, 'This petty Deval with a wrong mind will surely destroy us again. That is why even after giving protection to all beings, he does not remember his promise now.'॥ 59-60 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥