Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.50.57-58h: उनके संन्यास लेने का इरादा जानकर पितरोंसहित समस्त प्राणी रोने लगे और कहने लगे, 'अब हमें कौन उचित रीति से भोजन कराएगा?'॥57 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  9.50.57-58h 
संन्यासकृतबुद्धिं तं भूतानि पितृभि: सह॥ ५७॥
ततो दृष्ट्वा प्ररुरुदु: कोऽस्मान् संविभजिष्यति।
 
 
अनुवाद
उनके संन्यास लेने का इरादा जानकर पितरोंसहित समस्त प्राणी रोने लगे और कहने लगे, 'अब हमें कौन उचित रीति से भोजन कराएगा?'॥57 1/2॥
 
Knowing his intention to take sanyaas, all beings including ancestors started crying saying 'Who will now offer us food in a proper manner?'॥ 57 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)