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mahabharat 9.50.52: पक्षी की तरह उड़ते हुए वह अपने पवित्र आश्रम में पहुँच गया। आश्रम में प्रवेश करते ही देवल ने वहाँ ऋषि जैगीषव्य को बैठे देखा।   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.50.52 
स्वमाश्रमपदं पुण्यमाजगाम पतत्त्रिवत्।
प्रविशन्नेव चापश्यज्जैगीषव्यं स देवल:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
पक्षी की तरह उड़ते हुए वह अपने पवित्र आश्रम में पहुँच गया। आश्रम में प्रवेश करते ही देवल ने वहाँ ऋषि जैगीषव्य को बैठे देखा।
 
Flying like a bird he reached his holy hermitage. As soon as he entered the hermitage Devala saw sage Jaigishavya sitting there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)