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mahabharat 9.50.47-48h: सिद्धों ने कहा, "हे उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले देवल! सुनो। हम तुम्हें वह बात बता रहे हैं, जो घटित हो चुकी है। जैगीषव्य ऋषि सनातन ब्रह्मलोक को प्राप्त हो गए हैं।"   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  9.50.47-48h 
सिद्धा ऊचु:
शृणु देवल भूतार्थं शंसतां नो दृढव्रत॥ ४७॥
जैगीषव्य: स वै लोकं शाश्वतं ब्रह्मणो गत:।
 
 
अनुवाद
सिद्धों ने कहा, "हे उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले देवल! सुनो। हम तुम्हें वह बात बता रहे हैं, जो घटित हो चुकी है। जैगीषव्य ऋषि सनातन ब्रह्मलोक को प्राप्त हो गए हैं।"
 
The Siddhas said, "O Deval who firmly follows the best vows! Listen. We are telling you something which has already happened. The sage Jaigishavya has reached the eternal Brahmaloka. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)