Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.45-47h: इसके बाद धैर्यवान असित ने हाथ जोड़कर उन लोकों में रहने वाले ब्रह्मयाजी सिद्धों और साधुओं से विनयपूर्वक पूछा - 'महात्माओं! मैं अब महाबली जैगीषव्य को नहीं देख पा रहा हूँ। कृपया मुझे उनका पता बताइए। मैं उनके विषय में सुनना चाहता हूँ। मैं इसके लिए बहुत उत्सुक हूँ।'॥45-46 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके बाद धैर्यवान असित ने हाथ जोड़कर उन लोकों में रहने वाले ब्रह्मयाजी सिद्धों और साधुओं से विनयपूर्वक पूछा - 'महात्माओं! मैं अब महाबली जैगीषव्य को नहीं देख पा रहा हूँ। कृपया मुझे उनका पता बताइए। मैं उनके विषय में सुनना चाहता हूँ। मैं इसके लिए बहुत उत्सुक हूँ।'॥45-46 1/2॥
After this, the patient Asita folded his hands and humbly asked the Brahmayaji Siddhas and Sadhus living in those worlds - 'Mahatmas! I am not able to see the mighty Jaigishavya now. Please tell me his whereabouts. I want to hear about him. I am very eager for this.'॥ 45-46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥