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mahabharat 9.50.44-45h: तत्पश्चात् महाभाग देवल ने जैगीषव्य नामक उत्तम व्रत तथा अद्वितीय योगसिद्धि के प्रभाव का विचार किया।   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  9.50.44-45h 
सोऽचिन्तयन्महाभागो जैगीषव्यस्य देवल:॥ ४४॥
प्रभावं सुव्रतत्वं च सिद्धिं योगस्य चातुलाम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाभाग देवल ने जैगीषव्य नामक उत्तम व्रत तथा अद्वितीय योगसिद्धि के प्रभाव का विचार किया।
 
After that, Mahabhag Deval thought about the effect of Jaigishavya, the best fast and the unique Yogasiddhi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)