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mahabharat 9.50.38-39h: नरेश्वर! देवल ने नाना प्रकार के द्वादशाह यज्ञ करने वालों के लोकों में जैगीषव्य को देखा।   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.50.38-39h 
द्वादशाहैश्च सत्रैश्च यजन्ते विविधैर्नृप॥ ३८॥
तेषां लोकेष्वपश्यच्च जैगीषव्यं स देवल:।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! देवल ने नाना प्रकार के द्वादशाह यज्ञ करने वालों के लोकों में जैगीषव्य को देखा।
 
Nareshwar! Devla saw Jaigishavya in the worlds of those who perform various types of Dwadshah Yagyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)