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mahabharat 9.50.37-38h: देवलने ने दुर्लभ सर्वमेध और सौत्रामणि यज्ञ करने वालों के लोक में जैगीषव्य को देखा।   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  9.50.37-38h 
सर्वमेधं च दुष्प्रापं तथा सौत्रामणिं च ये॥ ३७॥
तेषां लोकेष्वपश्यच्च जैगीषव्यं स देवल:।
 
 
अनुवाद
देवलने ने दुर्लभ सर्वमेध और सौत्रामणि यज्ञ करने वालों के लोक में जैगीषव्य को देखा।
 
Devalne saw Jaigishavya in the worlds of those who perform the rare Sarvamedha and Sautramani Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)