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mahabharat 9.50.35-36h: राजसूय और पुण्डरीक यज्ञों द्वारा यज्ञ करने वालों के लोकों में भी देवल ने जैगीषव्य को देखा। 35 1/2   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  9.50.35-36h 
यजन्ते राजसूयेन पुण्डरीकेण चैव ये॥ ३५॥
तेषां लोकेष्वपश्यच्च जैगीषव्यं स देवल:।
 
 
अनुवाद
राजसूय और पुण्डरीक यज्ञों द्वारा यज्ञ करने वालों के लोकों में भी देवल ने जैगीषव्य को देखा। 35 1/2
 
Devala saw Jaigishavya even in the worlds of those who perform sacrifices through the Rajasuya and Pundarik sacrifices. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)