Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.34-35h: उन्होंने उन महाज्ञानी पुरुषों के लोकों में भी जैगीषव्य को देखा जो बहुत सी स्वर्ण दक्षिणाओं से उत्तम वाजपेय यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं ॥34 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वाजपेयं क्रतुवरं तथा बहुसुवर्णकम्॥ ३४॥
आहरन्ति महाप्राज्ञास्तेषां लोकेष्वपश्यत।
अनुवाद
उन्होंने उन महाज्ञानी पुरुषों के लोकों में भी जैगीषव्य को देखा जो बहुत सी स्वर्ण दक्षिणाओं से उत्तम वाजपेय यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं ॥34 1/2॥
He also saw Jaigishavya in the worlds of those great wise men who perform the rituals of the best Vajpayee Yagya with lots of golden dakshinas. 34 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥