Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.33-34h: वहां से देवल मुनि ने जैगीषव्य को देखा, जो अग्निष्टोमयाजी के लोक में पहुंचे थे और तपोधनों ने, जिन्होंने अग्निष्टुत यज्ञ के माध्यम से यज्ञ किया था। 33 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषां स्थानं ततो यातं तथाग्निष्टोमयाजिनाम्।
अग्निष्टुतेन च तथा ये यजन्ति तपोधना:॥ ३३॥
तत् स्थानमनुसम्प्राप्तमन्वपश्यत देवल:।
अनुवाद
वहां से देवल मुनि ने जैगीषव्य को देखा, जो अग्निष्टोमयाजी के लोक में पहुंचे थे और तपोधनों ने, जिन्होंने अग्निष्टुत यज्ञ के माध्यम से यज्ञ किया था। 33 1/2॥
From there, Deval Muni saw Jaigishavya, who had reached the world of Agnistomayaji and the Tapodhanas who performed the Yagya through Agnishtuta Yagya. 33 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥