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mahabharat 9.50.30: फिर वह एकान्त यज्ञ करनेवाले मनुष्यों के उत्तम लोकों की ओर उड़ता हुआ दिखाई दिया। वहाँ से वह अग्निहोत्रियों के लोकों में गया ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.50.30 
लोकान् समुत्पतन्तं तु शुभानेकान्तयाजिनाम्।
ततोऽग्निहोत्रिणां लोकांस्ततश्चाप्युत्पपात ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
फिर वह एकान्त यज्ञ करनेवाले मनुष्यों के उत्तम लोकों की ओर उड़ता हुआ दिखाई दिया। वहाँ से वह अग्निहोत्रियों के लोकों में गया ॥30॥
 
Then he was seen flying towards the better worlds of people performing solitary sacrifices. From there he went to the worlds of Agnihotris. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)