Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.50.23-24h: राजेन्द्र! जैगीष्य की तपस्या का योग प्रभाव देखकर महर्षि देवल पुनः विचार करने लगे - 'मैंने अभी-अभी इन्हें समुद्रतट पर देखा है, फिर ये आश्रम में कैसे उपस्थित हैं?'॥23 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वा प्रभावं तपसो जैगीषव्यस्य योगजम्।
चिन्तयामास राजेन्द्र तदा स मुनिसत्तम:॥ २३॥
मया दृष्ट: समुद्रे च आश्रमे च कथं त्वयम्।
अनुवाद
राजेन्द्र! जैगीष्य की तपस्या का योग प्रभाव देखकर महर्षि देवल पुनः विचार करने लगे - 'मैंने अभी-अभी इन्हें समुद्रतट पर देखा है, फिर ये आश्रम में कैसे उपस्थित हैं?'॥23 1/2॥
Rajendra! Seeing the yogic effect of Jaigishya's penance, the great sage Deval again started thinking - 'I have seen him just now on the seashore, then how is he present in the ashram?'॥ 23 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥