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mahabharat 9.50.13-14h: उन्होंने सोचा, 'मुझे इनकी पूजा करते हुए बहुत वर्ष हो गए; परंतु उन आलसी भिक्षुओं ने आज तक एक शब्द भी नहीं कहा।'॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 50: आदित्यतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें असित देवल तथा जैगीषव्य मुनिका चरित्र  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  9.50.13-14h 
समास्तु समतिक्रान्ता बह्वॺ: पूजयतो मम॥ १३॥
न चायमलसो भिक्षुरभ्यभाषत किंचन।
 
 
अनुवाद
उन्होंने सोचा, 'मुझे इनकी पूजा करते हुए बहुत वर्ष हो गए; परंतु उन आलसी भिक्षुओं ने आज तक एक शब्द भी नहीं कहा।'॥13 1/2॥
 
He thought, 'It has been many years since I have been worshipping them; but those lazy bhikshus have not spoken a single word till date.'॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)