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mahabharat 9.5.52: राजन! वे सब क्षत्रिय काल से प्रेरित होकर आपके पुत्र के द्वारा प्रोत्साहित होकर अपने मन को स्थिर करके पुनः युद्धभूमि में लौट आये।   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  9.5.52 
तव पुत्रकृतोत्साहा: पर्यवर्तन्त ते तत:।
पर्यवस्थाप्य चात्मानमन्योन्येन पुनस्तदा।
सर्वे राजन् न्यवर्तन्त क्षत्रिया: कालचोदिता:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
राजन! वे सब क्षत्रिय काल से प्रेरित होकर आपके पुत्र के द्वारा प्रोत्साहित होकर अपने मन को स्थिर करके पुनः युद्धभूमि में लौट आये।
 
King! All those Kshatriyas, inspired by time, after being encouraged by your son, steadied their minds and returned to the battlefield again.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि दुर्योधनवाक्ये पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें दुर्योधनका वाक्यविषयक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)