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mahabharat 9.5.46: यदि मैं अपने बंधु-बांधवों से रहित होकर युधिष्ठिर के चरणों पर गिरूँ तो मुझे कैसा राज्य मिलेगा?॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  9.5.46 
कीदृशं च भवेद् राज्यं मम हीनस्य बन्धुभि:।
सखिभिश्च विशेषेण प्रणिपत्य च पाण्डवम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं अपने बंधु-बांधवों से रहित होकर युधिष्ठिर के चरणों पर गिरूँ तो मुझे कैसा राज्य मिलेगा?॥ 46॥
 
‘What sort of a kingdom will I get if I fall at the feet of Yudhishthira, being devoid of my relatives and friends?॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)