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mahabharat 9.5.43: उन वीर पुरुषों द्वारा स्वयं बनाया हुआ मार्ग पुनः उस मार्ग पर शीघ्रता से चलने वाले वीरों की भीड़ के लिए दुर्गम हो जाए (अर्थात् उस मार्ग पर इतने वीर पुरुष चलें कि भीड़ के कारण उस पर चलना कठिन हो जाए)॥43॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.5.43 
तै: स्वयं रचितो मार्गो दुर्गमो हि पुनर्भवेत्।
सम्पतद्भिर्महावेगैर्यास्यद्भिरिह सद्‍गतिम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उन वीर पुरुषों द्वारा स्वयं बनाया हुआ मार्ग पुनः उस मार्ग पर शीघ्रता से चलने वाले वीरों की भीड़ के लिए दुर्गम हो जाए (अर्थात् उस मार्ग पर इतने वीर पुरुष चलें कि भीड़ के कारण उस पर चलना कठिन हो जाए)॥43॥
 
The path created by those brave men themselves may again become inaccessible to the multitudes of brave men speedily travelling on that path (i.e. so many brave men may travel on that path that it becomes difficult to walk on it due to the crowd).॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)