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mahabharat 9.5.4: सबने तुम्हें बार-बार शत्रु सेना में घुसकर अत्यन्त तेजस्वी एवं पराक्रमी पाण्डव योद्धाओं के साथ युद्ध करते देखा है।   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.5.4 
गाहमानमनीकानि युध्यमानं महारथै:।
पाण्डवैरतितेजोभिर्लोकस्त्वामनुदृष्टवान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सबने तुम्हें बार-बार शत्रु सेना में घुसकर अत्यन्त तेजस्वी एवं पराक्रमी पाण्डव योद्धाओं के साथ युद्ध करते देखा है।
 
‘Everyone has seen you repeatedly entering the enemy's army and fighting with the extremely brilliant and mighty warriors, the Pandavas. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)