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mahabharat 9.5.39-40: क्या अब हम भी उसी मार्ग पर चलेंगे जिस पर देवता और युद्ध में पीठ न दिखाने वाले वीर योद्धा, हमारे वृद्ध पितामह, बुद्धिमान गुरु द्रोण, जयद्रथ, कर्ण और दु:शासन आदि चलते हैं?॥ 39-40॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  9.5.39-40 
पन्थानममरैर्यान्तं शूरैश्चैवानिवर्तिभि:।
अपि तत्संगतं मार्गं वयमध्यारुहेमहि॥ ३९॥
पितामहेन वृद्धेन तथाऽऽचार्येण धीमता।
जयद्रथेन कर्णेन तथा दु:शासनेन च॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
क्या अब हम भी उसी मार्ग पर चलेंगे जिस पर देवता और युद्ध में पीठ न दिखाने वाले वीर योद्धा, हमारे वृद्ध पितामह, बुद्धिमान गुरु द्रोण, जयद्रथ, कर्ण और दु:शासन आदि चलते हैं?॥ 39-40॥
 
Will we also now tread the same path that is trodden by the gods and by the valiant warriors who never turn their backs in battle, along with our aged grandfather, our wise teacher Drona, Jayadratha, Karna and Dushasan?॥ 39-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)