Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.5.34: जिसका शरीर बुढ़ापे के कारण दुर्बल हो गया हो, जो रोग से पीड़ित हो, जिसके चारों ओर परिवार के लोग रो रहे हों और जो ऐसे रोते हुए स्वजनों के बीच में शोक से विलाप करते हुए अपने प्राण त्याग दे, वह मनुष्य कहलाने के योग्य नहीं है। | mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृपणं विलपन्नार्तो जरयाभिपरिप्लुत:।
म्रियते रुदतां मध्ये ज्ञातीनां न स पूरुष:॥ ३४॥
अनुवाद
जिसका शरीर बुढ़ापे के कारण दुर्बल हो गया हो, जो रोग से पीड़ित हो, जिसके चारों ओर परिवार के लोग रो रहे हों और जो ऐसे रोते हुए स्वजनों के बीच में शोक से विलाप करते हुए अपने प्राण त्याग दे, वह मनुष्य कहलाने के योग्य नहीं है।
A person whose body is weakened by old age, who is afflicted with disease, around whom his family members are weeping, and who gives up his life in the midst of such weeping relatives while wailing in sorrow, is not worthy of being called a man. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥