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mahabharat 9.5.26-27h: हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले वीर योद्धा! अब मैं उत्तम युद्ध करना ही सर्वोत्तम नीति समझता हूँ। यह समय कायरता दिखाने का नहीं, बल्कि उत्साहपूर्वक युद्ध करने का है।॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  9.5.26-27h 
सुनीतमनुपश्यामि सुयुद्धेन परंतप॥ २६॥
नायं क्लीबयितुं काल: संयोद्धुं काल एव न:।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले वीर योद्धा! अब मैं उत्तम युद्ध करना ही सर्वोत्तम नीति समझता हूँ। यह समय कायरता दिखाने का नहीं, बल्कि उत्साहपूर्वक युद्ध करने का है।॥26 1/2॥
 
O brave warrior who torments his enemies! Now I consider the best policy to be to fight a good war. This is not the time for us to show cowardice, but to fight enthusiastically.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)