Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.5.24-25h: मैं स्वयं अनेक सुख भोगकर और बहुत-सा धन दान करके अब दरिद्रों के साथ दीन-हीन जीवन-यापन करके कैसे निर्वाह कर सकूँगा?॥24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं भुक्त्वा स्वयं भोगान् दत्त्वा दायांश्च पुष्कलान्॥ २४॥
कृपणं वर्तयिष्यामि कृपणै: सह जीविकाम्।
अनुवाद
मैं स्वयं अनेक सुख भोगकर और बहुत-सा धन दान करके अब दरिद्रों के साथ दीन-हीन जीवन-यापन करके कैसे निर्वाह कर सकूँगा?॥24 1/2॥
Having myself enjoyed many pleasures and having given away a lot of wealth, how will I now be able to survive by adopting a humble livelihood along with poor people?॥ 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥