Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.5.18-19: इसीलिए अब उन शत्रुओं को सताने वाले वीरों को युद्ध करने से रोका नहीं जा सकता। जब से द्रौपदी का चीरहरण हुआ है, तब से वह दुःखी होकर प्रतिदिन मिट्टी की वेदी पर सोती रहती है और मुझे नष्ट करने की प्रतिज्ञा करती है। उसने यह प्रतिज्ञा तब तक की है जब तक कि शत्रुता का पूर्णतया प्रतिशोध न हो जाए।॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न निवारयितुं शक्या: संग्रामात्ते परंतपा:॥ १८॥
यदा च द्रौपदी क्लिष्टा मद्विनाशाय दु:खिता।
स्थण्डिले नित्यदा शेते यावद् वैरस्य यातनम्॥ १९॥
अनुवाद
इसीलिए अब उन शत्रुओं को सताने वाले वीरों को युद्ध करने से रोका नहीं जा सकता। जब से द्रौपदी का चीरहरण हुआ है, तब से वह दुःखी होकर प्रतिदिन मिट्टी की वेदी पर सोती रहती है और मुझे नष्ट करने की प्रतिज्ञा करती है। उसने यह प्रतिज्ञा तब तक की है जब तक कि शत्रुता का पूर्णतया प्रतिशोध न हो जाए।॥18-19॥
‘That is why now those enemy-tormenting heroes cannot be stopped from fighting. Ever since Draupadi was tortured, she has been saddened and has been sleeping on a mud altar every day, vowing to destroy me. She has taken this vow until the enmity is completely avenged.॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥