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mahabharat 9.5.17-18h: द्रौपदी केवल एक वस्त्र पहने हुए थी और रजस्वला थी। उस अवस्था में उसे सभा में लाया गया और दु:शासन ने सबके सामने उसे महान कष्ट दिया, उसके वस्त्र उतार दिए गए और जिस दयनीय अवस्था में उसे छोड़ दिया गया, ये सब बातें आज भी पाण्डवों को स्मरण हैं॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  9.5.17-18h 
दु:शासनेन यत् कृष्णा एकवस्त्रा रजस्वला।
परिक्लिष्टा सभामध्ये सर्वलोकस्य पश्यत:॥ १७॥
तथा विवसनां दीनां स्मरन्त्यद्यापि पाण्डवा:।
 
 
अनुवाद
द्रौपदी केवल एक वस्त्र पहने हुए थी और रजस्वला थी। उस अवस्था में उसे सभा में लाया गया और दु:शासन ने सबके सामने उसे महान कष्ट दिया, उसके वस्त्र उतार दिए गए और जिस दयनीय अवस्था में उसे छोड़ दिया गया, ये सब बातें आज भी पाण्डवों को स्मरण हैं॥17 1/2॥
 
‘Draupadi was wearing only one cloth and was menstruating. In that state she was brought to the court and Dushasan inflicted great pain on her in front of everyone, her clothes were removed and the pitiable state in which she was left, all these things are remembered by the Pandavas even today.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)