श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.5.14 
मध्यम: पाण्डवस्तीक्ष्णो भीमसेनो महाबल:।
प्रतिज्ञातं च तेनोग्रं भज्येतापि न संनमेत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मध्यम पाण्डव महाबली भीमसेन का स्वभाव बड़ा कठोर है। उन्होंने बड़ी भयंकर प्रतिज्ञा की है। सूखी लकड़ी के समान वे टूट तो सकते हैं, पर झुक नहीं सकते॥14॥
 
The middle Pandava, the mighty Bhimasena, has a very tough nature. He has taken a very terrible vow. Like a dry piece of wood, he may break but cannot bend.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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