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mahabharat 9.5.13: अभिमन्यु के मारे जाने पर अर्जुन को भी शांति नहीं मिली, फिर मेरी प्रार्थना करने पर भी वह मेरे कल्याण के लिए कैसे प्रयत्न करेगा?॥13॥   |   mahabharat अध्याय 9.5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.5.13 
अभिमन्योर्विनाशेन न शर्म लभतेऽर्जुन:।
स कथं मद्धिते यत्नं प्रकरिष्यति याचित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु के मारे जाने पर अर्जुन को भी शांति नहीं मिली, फिर मेरी प्रार्थना करने पर भी वह मेरे कल्याण के लिए कैसे प्रयत्न करेगा?॥13॥
 
Even Arjuna is not at peace after the death of Abhimanyu. Then how will he make efforts for my welfare even after I pray to him?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)